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बहराइच: इतिहास

बहराइच: इतिहास

बहराइच के बारे में ऐसी मान्यता है कि यह सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा की राजधानी था ब्रहमाइच का अपभ्रंश बहराइच है। एक अन्य मान्यता के अनुसार भर जातियों के निवास स्थान के कारण इस क्षेत्र को भराइच या बहराइच कहा जाने लगा बहराइच भरो के राजा महाराजा सुहेलदेव की राजधानी रहा है। बहराइच महर्षि बालार्क की तपोस्थली रहा है। जिसपर बाद में विदेशी क्रूर आक्रांता सैयद सालार मसूद गाजी रहने लगे बहराइच का एक शानदार अतीत रहा है जो प्राचीन काल से है। मौर्य काल में यह शहर बौद्ध संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र था। यह मुगल साम्राज्य का भी एक हिस्सा था और 18वीं शताब्दी में अवध के नवाबों द्वारा शासित था। 1801 में, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शहर पर नियंत्रण कर लिया था बहराइच किसान आंदोलन का बड़ा केंद्र रहा है मदारी पासी के नेतृत्व में एका आंदोलन का केंद्र रहा है बहराइच विदेशी आक्रांता सैय्यद सालार मसूद गाज़ी और सुहेल देव के युद्ध इसी बहराइच की सरज़मीन पर हुई थी। गाज़ी एक प्रसिद्ध ग्यारहवीं शताब्दी का इस्लामिक कट्टरपंथी और विदेशी आक्रांता था जिसकी दरगाह शहर में मौजूद है। उनकी दरगाह मुसलमानों के लिए समान रूप से श्रद्धा का स्थान है। जिसे फिरोज शाह तुगलक ने बनवाया था। ग्यारहवीं शताब्दी में महाराजा सुहेलदेव ने विभिन्न आस पड़ोस के राजाओं के साथ एक संयुक्त सैनिकों का गठन किया और फिर गाजी की सेना को परास्त किया। जिस स्थान पर गाजी का सिर कलम किया वह शहर के बीचों-बीच घण्टाघर पर मज़ार(खंजर शहीद बाबा) के नाम से विख्यात है बहराइच की लड़ाई में वीर शिरोमणि महाराजा सुहेलदेव ने 21 राजाओं का गठबंधन बनाकर सैयद सालार मसूद गाजी को युद्ध में शिकस्त दी। इन राजाओं में बहराइच, श्रावस्ती के साथ ही लखीमपुर, सीतापुर, लखनऊ और बाराबंकी के राजा भी शामिल थे। महराजा सुहेलदेव बहराइच के एक न्यायप्रिय शासक थे जिनका युद्ध अफगान सूबेदार तथा विदेशी आक्रांता सैयद सालार मसूद गाजी से हुआ जिसमें मसूद गाजी बुरी तरह परास्त और सुहेलदेव ने मसूद गाजी को मार कर अपने राज्य को सुदृढ़ किया बहराइच सोलह महाजनपद के समय कोसल महाजनपद का अंग था उस समय कोसल की राजधानी श्रावस्ती थी जो बहराइच का ही विस्तार है।

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Quelle: Text: Wikipedia – „बहराइच“, Autorinnen und Autoren (Versionsgeschichte), CC BY-SA 4.0 · Foto: Faranjuned, CC BY-SA 3.0 – Wikimedia Commons