Heimatgeschichte · Rudrapur ·

रुद्रपुर: इतिहास

रुद्रपुर: इतिहास

रुद्रपुर नगर की स्थापना अल्मोड़ा के राजा रुद्र चंद ने सोलहवीं शताब्दी में करी थी।:6 दक्षिण के मुस्लिम राजाओं द्वारा तराई क्षेत्र में लगातार हो रहे आक्रमणों से निजात पाने के लिए उन्होंने रूद्रपुर में एक सैन्य शिविर की स्थापना की। बाज बहादुर चन्द के राज के समय से तराई क्षेत्र के लाट (अधिकारी) का निवास भी यहाँ ही हो गया।:81 १७४४ में चन्दों तथा रुहेलाओं के बीच लड़ी गयी रुद्रपुर की लड़ाई में शिव देव जोशी की अगुवाई में कुमाउँनी सेना को गंभीर हार का सामना करना पड़ा था।:92 इसके कुछ वर्षों बाद राजा दीप चन्द ने रुहेलाओं की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए रुद्रपुर में एक किले का निर्माण किया।:8 :95
अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, काशीपुर के लाट नंद राम ने रुद्रपुर के अधिकारी मनोरथ जोशी की हत्या कर दी, और काशीपुर में अपनी राजधानी स्थापित कर स्वयं को निचले तराई क्षेत्रों का शासक घोषित कर दिया।:320 १७९० में अल्मोड़ा के पतन के बाद, उसने रुद्रपुर और उसके पूर्व की ओर स्थित क्षेत्रों को अवध के नवाब को सौंप दिया गया, जिनका अधिपत्य इन क्षेत्रों पर १८०१ में अंग्रेजों के कब्जे तक रहा।
१८३७ में रुद्रपुर को रुहेलखंड के कलेक्टर के अधीन कर दिया गया।:445 १८५८ में इसे कुमाऊँ डिविजनरी के तहत लाया गया, लेकिन १८६१ में इसे वापस रुहेलखंड मण्डल में स्थानांतरित कर दिया गया।:445 १८६४-६५ में पूरे तराई-भाबर को "तराई और भाबर सरकारी अधिनियम" के तहत रखा गया, जिसे ब्रिटिश सरकार द्वारा सीधे नियंत्रित किया जाना था। १८९१ में, तराई जनपद को नष्ट कर दिया गया, और रुद्रपुर को नवनिर्मित नैनीताल जनपद में डाल दिया गया। स्वतंत्रता के बाद रुद्रपुर और नैनीताल जनपद के अन्य हिस्से संयुक्त प्रांत में ही मिले रहे, जिसका नाम बाद में उत्तर प्रदेश राज्य हो गया था।
१९८४ में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद, कई सिख चरमपंथियों ने पंजाब छोड़ दिया और उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों में शरण ली।:214 इसके बाद १९९१ में नगर में बम विस्फोटों के कई मामले सामने आए थे। १९९१ के मध्य में रुद्रपुर बाजार में एक बम विस्फोट हुआ, और रोडवेज़ की बस में भी एक बम समय रहते डिफ्यूज किया गया था। १७ अक्तूबर १९९१ को नगर में रामलीला के उत्सव में दो बम विस्फोट हुए, जिनमें ४१ लोगों की मृत्यु हो गई, और १४० से अधिक घायल हो गए थे। बाद में क्षेत्र में खालिस्तान कमांडो फोर्स के दो सदस्यों की मार गिराया गया था।
१९९४ तक उत्तराखण्ड क्षेत्र के लिए पृथक राज्य की मांग पूरे क्षेत्र में स्थानीय आबादी और राजनीतिक दलों, दोनों के बीच लगभग सर्वसम्मति से स्वीकार हो चुकी थी। ३० सितंबर १९९५ को नैनीताल जनपद के तराई क्षेत्र की चार तहसीलों (किच्छा, काशीपुर, सितारगंज तथा खटीमा) को मिलाकर उधम सिंह नगर जनपद का गठन किया गया और रुद्रपुर को इस जनपद का मुख्यालय बनाया गया। ९ नवंबर २००० को भारत की संसद ने उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, २००० को पारित किया, और रुद्रपुर उत्तराखण्ड का भाग बन गया, जो भारत गणराज्य का २७वां राज्य था।

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Quelle: Text: Wikipedia – „रुद्रपुर“, Autorinnen und Autoren (Versionsgeschichte), CC BY-SA 4.0