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हज़ारीबाग: इतिहास

हज़ारीबाग: इतिहास

उत्तरी छोटानागपुर का हजारीबाग जिला पर्यावरण की दृष्टि से काफी धनी है. यह दो गांवों को मिलाकर बना था. इसका नाम हजारीबाग क्यों पड़ा? इसको लेकर कई मत हैं. इस लेख में हम आपको इसकी स्थापना से लेकर अखंड हजारीबाग की अवधारणा और इतिहास के विषय में बताएंगे।
हजारीबाग का गठन मूलत दो गांवों को मिला कर हुआ. जिसकी चर्चा तत्कालीन प्रथम सर्वेक्षक मेजर जेम्स रेनेल ने 1779 ई. में रामगढ़ जिला के प्रथम मानचित्र में की है। उन्होंने ओकन्ड हजारी नाम दिया, जो वर्तमान हजारीबाग नगर के अंतर्गत ओकनी और हजारी दो गांवों का द्योतक था। ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि हजारी गांव के निकट आम्र वृक्षों की बहुतायत के कारण इसका नाम हजारीबाग रखा गया हो। पर कतिपय लोग हजारों बाग से भरे क्षेत्र के कारण हजारीबाग नाम रखा हुआ मानते हैं।
हजारीबाग जिले की स्थापना 1833 ई. में हुई. वर्तमान में गिरिडीह, चतरा, कोडरमा, रामगढ़ जो जिले हैं, इनका पूरा क्षेत्रफल हजारीबाग जिला में ही शामिल था। एक अक्तूबर 1886 ई. में सरकारी अधिसूचना द्वारा नगर पालिका की स्थापना हुई. हजारीबाग की जनसंख्या लगभग 10 हजार थी। नगर पालिका का प्रथम चेयरमैन मेजर इजी लिलिंग्टन थे। फरवरी 1919 ई. तक नगर पालिका के चेयरमैन पद पर अंग्रेज सैनिक अफसर ही बैठते थे। पहला भारतीय चेयरमैन कालीपद सरकार 27 फरवरी 1919 ई. में बने। 1900 ई. में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए जिला परिषद की स्थापना हुई। जो ग्रामीण क्षेत्र की सड़क, अस्पताल, शिक्षा, कांजी हाउस, पेयजल व्यवस्था का कार्य देखते थे। 1936 ई. में खनिज क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य की व्यवस्था के लिए खान परिषद की स्थापना की गई।

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Quelle: Text: Wikipedia – „हज़ारीबाग“, Autorinnen und Autoren (Versionsgeschichte), CC BY-SA 4.0 · Foto: Bijendra Hansda Purudhul, CC BY-SA 4.0 – Wikimedia Commons