लौंगत्लाइ ज़िला: इतिहास
१९वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश लोगों के आवागमन से पूर्व वर्तमान लौंगत्लाइ ज़िले का क्षेत्र में स्थानीय जनजातीय सरदारों द्वारा शासित होता था, जिनके क्षेत्र एक गाँव या कुछ गाँवों तक सिमित रहते थे। १८८८ ईस्वी में फुंगका ग्राम के लोगों ने ब्रिटिश सर्वेक्षण दल पर हमला किया जिसमे लेफ्टिनेन्ट स्टीवर्ट सहित चार लोग मारे गये। अगले ही वर्ष ब्रिटिशों ने दमनकारी अभियान प्रारम्भ किया। इसके पश्चात् ज़िले को दक्षिण लुशाई हिल्स ज़िले में मिला दिया गया जिसका प्रशासन बंगाल के लेफ्टिनेन्ट गवर्नर देखता था। १८९८ ईस्वी में दक्षिण लुशाई हिल्स ज़िले को लुशाई हिल्स ज़िले के साथ मिला दिया गया जो असम के प्रशासन क्षेत्र में आता था। १९१९ ईस्वी में भारत सरकार अधिनियम, १९१९ द्वारा "पिछड़ा क्षेत्र" तथा १९३५ के द्वारा इसे "बहिष्कृत क्षेत्र" घोषित कर दिया गया। भारत की स्वतंत्रता के बाद १९५२ ईस्वी में लुशाई हिल्स स्वायत्त ज़िला परिषद घोषित करके स्थानीय जनजातीय सरदारों की शक्ति छीन ली गयी। यह क्षेत्र १९७२ ईस्वी में मिज़ोरम के केन्द्र-शासित घोषित होने के बाद इसका हिस्सा बन गया तथा १९८७ में मिज़ोरम राज्य बन गया। प्रारम्भ में यह छिमतुइपुई ज़िला का हिस्सा था तथा ११ नवम्बर १९८८ को यह अलग ज़िला बना।