Heimatgeschichte · Kairana ·

कैराना: इतिहास

कैराना: इतिहास

कहा जाता है के अनुसार महाभारत काल मे अंगराज कर्ण कर्णपुरी कैराना की स्थापना की थी। समय-समय पर इस ऐतिहासिक नगर का नाम बदलता रहा और आधुनिक समय में यह कैराना के नाम से संबोधित किया जाता है। यह शहर अपनी गंगा जमुनी तहजीब और हिन्दू मुस्लिम संस्कृति के कारण जाना जाता है। बादशाह जहांगीर के मंत्री नवाब मुकर्रब खां ने नोलखा बाग़' अर्थात नो लाख फलदार वृक्षों के बाग के मध्य में नवाब तालाब का निर्माण कराया था। तालाब में जल निकट ही यमुना नदी से आता था।आसपास कई दयनीय अवस्था में अवशेष देखे जा सकते हैं।

इस तालाब वाले बाग़ के 'आम' अकबर और जहांगीर को पसंद थे।

सम्राट जहांगीर ने कुछ समय इस बाग़ और तालाब पर बिताया था। अपनी आत्मकथा "तुज़्क-ए-जहाँगीरी" में लिखते हैं कि:रविवार तारीख 16 को मैंने दिल्ली से प्रयाण (प्रस्थान) किया और शुक्रवार तारीख 21 को मैं परगना केराना (कैराना, सरकार सहारनपुर) में ठहरा। यह परगना मुकर्रब खां का पुराना स्थान है। यहां की आबो हवा न ठण्डी है और न गरम है। यहां की भूमि अच्छी है। मुकर्रब खां ने यहां बाग और इमारतें बनाई थी। शनिवार तारीख 22 को मैं और महिलायें इसमें घूमी यह वास्तव में आनन्ददायक बाग है। एक सौ चालीस बीधा फूलों की क्यारियां हैं। बाग के बीचों बीच एक तालाब है वह 220 गज लम्बा और 200 गज चौड़ा है। तालाब के बीच में चांदनी के समय बैठने के लिए एक समचतुष्कोण महताब बना हुआ है इसकी एक भुजा 22 गज है। यहां सब प्रकार के वृक्ष हैं ईरान में पैदा होने वाले वृक्षों में मैंने यहां पिस्ता का वृक्ष देखा और एक बहुत ही मनोहर साइप्रस (सरो) का वृक्ष देखा इस बाग में साइप्रस के 300 वृक्ष थे। तालाब के चारों ओर उपयुक्त इमारतें बन रही हैं।
"तुज़्क-ए-जहाँगीरी" इंग्लिश, दूसरे वॉल्यूम में भी यह विवरण मिलता है।

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Quelle: Text: Wikipedia – „कैराना“, Autorinnen und Autoren (Versionsgeschichte), CC BY-SA 4.0 · Foto: Anang M, CC BY 3.0 – Wikimedia Commons