फलोदी: इतिहास
फलोदी मुख्य रूप से फलवृद्धिका नाम से बसा है। इसका सबसे प्राचीन नाम विजयनगर था विक्रम संवत 1515 में श्री सिद्धू कल्ला के आग्रह पर जोधपुर के राव जोधा के पौत्र वह तत्कालीन राजा राव सूजा के पुत्र राव नरा ने स्थापना की थीं, और यहां किले का निर्माण करवाया। राव नरा के वंशज नरावत राठौड़ कहलाए। उस समय इसका नाम फलवृधिका रखा गया जो वर्तमान में फलोदी के नाम से जाना जाता है। फलोदी नाम श्री सिद्धु कल्ला की विधवा बेटी फला के कहने पर रखा गया , फला का योगदान फलोदी के दुर्ग में रहा है। राव नरा के बाद उनके पुत्र राव हम्मीर ने यहां राज किया, जिनकी आज इस इलाके में विशेष मान्यता है उनकी आज भी इस इलाके में पूजा होती हैं कुर्जा (crane) के लिए काफी प्रसिद्ध है, जहाँ से 4 किलोमीटर की दूरी पर एक खीचन नामक गाँव है जहाँ पर पूरे जोधपुर ज़िले में सर्वाधिक कुरजा आती है । यहां कई विदेशी पर्यटक कुरजा देखने आते है यह एक पर्यटन स्थलों में है।