Heimatgeschichte · Jhanjharpur ·

झंझारपुर: प्राचीन इतिहास

झंझारपुर: प्राचीन इतिहास

मिथिला में झंझारपुर अनुमंडल के प्रक्षेत्र में यत्र-तत्र इतिहास अपने समुन्नत अतीत की गाथा जीर्ण-शीर्ण पड़े टीलों, खंडहरों, मूर्तियों एवं शिलालेखों के माध्यम से सुनाता प्रतीत होता है तो इसका कण-कण दर्शन की गुत्थियों को सुलझाने में अहर्निश रत मालूम पड़ता है
9वीं सदी में झंझारपुर अनुमंडल के अन्धराठाढ़ी प्रखंड को 'सर्वतंत्र', ‘षड्दर्शन वल्लभ’ वाचस्पति को अपनी गोद में खेलाने का गौरव प्राप्त है ,न्याय वर्त्तिक पर ‘न्याय वार्त्तिक तात्पर्य टीका’, शंकर भाष्य पर ‘भामती टीका’ सांख्य दर्शन पर ‘सांख्य तत्त्व कौमुदी’, मंडन मिश्र की ‘ब्रहमसिद्ध’ पर भाष्य उनकी प्रसिद्ध रचना है। अपनी पुत्रहीना पत्नी भामती के नाम पर उन्होंने जिस भामती टीका की रचना की वह दर्शन के क्षेत्र में कालजयी रचना है।
इसी भू-भाग अन्धराठाढ़ी के कमलादित्य स्थान को 11वीं सदी में मिथिला प्रक्षेत्र की राजधानी होने को गौरव प्राप्त है। यहाँ के ‘‘लक्ष्मी नारायण‘‘ की खंडित प्रतिमा की पाद पीठ पर प्राचीन मिथिलाक्षर में रचित ‘श्रीधर‘ का प्रसिद्ध शिलालेख उत्कीर्ण है-

श्रीमन्नान्यपतिजैता गुणरत्न महार्णवः।
यत्कीर्त्थाजनितो विश्वे द्वितय क्षीरसागरः॥
मन्त्रिण तस्य नान्यस्य क्षत्र वंशाब्ज भनुना।
तेनायं कारितो देवः श्रीधरः श्रीधरेण च॥
मिथिलाक्षर अथवा तिरहुता में उत्कीर्ण यह प्राचीनतम शिलालेख है। श्रीधर ने अपने राजा नान्यदेव की कीर्ति का बखान किया है। श्रीधर की कालजयी प्रतिभा के कारण पं. सहदेव झा ने उन्हें अपर चाणक्य कहा है। नान्यदेव ने 1097 ई. में मिथिला राज्य अपनी सामरिक शक्ति तथा श्रीधर की कूटनीति के बल पर प्राप्त किया था। आधुनिक काल में मिथिला ने उन्हीं के नेतृत्व में अपनी स्वतंत्र सत्ता का सुख भोगा था। कमलादित्य स्थान में अष्टदल कमल, मकरवाहिनी और कच्छयवाहिनी की मूर्तियाँ है। मंदिर के चौकठ पर उत्कीर्ण नर-नारियों की प्रतिमाएँ कर्णाट काल की कमनीयता की कहानी कहती प्रतीत होती है।
नान्य के बाद उनके पुत्रों मल्ल और गंगदेव में राज्य का बँटवारा हो गया। झंझारपुर अनुमंडल के मधेपुर प्रखंड का भीठ भगवानपुर मल्लदेव की राजधानी रही। भीठ भगवानपुर में मूर्तिकला का अभिनव उदाहरण आज भी दर्शनीय है। इन मूत्तियों में लक्ष्मी नारायण, गणेश तथा सूर्य की मूत्तियाँ उत्कृष्ट कोटि की हैं। लक्ष्मी नारायण मूर्त्ति की आधार पीठिका पर 'ॐ श्री मल्लदेवस्य.......... …

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Quelle: Text: Wikipedia – „झंझारपुर“, Autorinnen und Autoren (Versionsgeschichte), CC BY-SA 4.0 · Foto: Earth Science and Remote Sensing Unit, Lyndon B. Johnson Space Center, Public domain – Wikimedia Commons