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मेहसी: इतिहास

मेहसी: इतिहास

=== मुगल काल ===
मेहसी की ऐतिहासिक पहचान मुगल प्रशासनिक अभिलेखों में मिहसी और मिहसी नामों से दर्ज है। आइन-ए-अकबरी में अकबर के शासनकाल के दौरान मिहसी को सरकार चंपारण की एक परगना के रूप में दर्ज किया गया है।
आइन-ए-अकबरी के प्रकाशित पाठ में मिहसी को सरकार चंपारण की प्रशासनिक-राजस्व इकाइयों में भी दर्ज किया गया है।

मुगल काल के बाद भी मेहसी नाम प्रशासनिक और राजस्व अभिलेखों में मिलता है। 1769 के फारसी पत्राचार में मिहसी के पेशकार का उल्लेख अठारहवीं शताब्दी में इसके प्रशासनिक उपयोग का प्रमाण है।
एक ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, 1771 में मेहसी और बाबरा को श्रीकृष्ण सिंह और अवधूत सिंह को दिया गया था। 1791 के दशकीय बंदोबस्त में मेहसी और बाबरा शिवहर राज की व्यवस्था का हिस्सा बने और 1793 के स्थायी बंदोबस्त में इस व्यवस्था की पुष्टि की गई।
1885 में जे. बीम्स ने सिमरनव, मिहसी और मजहौवा को सरकार चंपारण के तीन महालों के रूप में दर्ज किया।

1938 के चंपारण गजेटियर में मेहसी को मोतिहारी से लगभग 29 मील दक्षिण-पूर्व और मोतिहारी से मुजफ्फरपुर जाने वाले मार्ग पर स्थित बताया गया है।
गजेटियर के अनुसार, ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा क्षेत्र पर अधिकार प्राप्त किए जाने के समय मेहसी को चंपारण का सदर या प्रमुख सिविल स्टेशन माना जाता था। गजेटियर में मेहसी में मुनसिफ की अदालत तथा ऐतिहासिक मेहसी परगना से इसके संबंध का भी उल्लेख मिलता है।

पूर्ववर्ती चंपारण जिले को 1 दिसंबर 1971 को पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण में विभाजित किया गया। मेहसी वर्तमान में पूर्वी चंपारण जिले का एक शहरी स्थानीय निकाय है।

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Quelle: Text: Wikipedia – „मेहसी“, Autorinnen und Autoren (Versionsgeschichte), CC BY-SA 4.0 · Foto: Earth Science and Remote Sensing Unit, Lyndon B. Johnson Space Center, Public domain – Wikimedia Commons