दमन: इतिहास
पूर्तगाली डियोगो डी मेलो संयोगवश सन् १५२३ में इस स्थान पर पहुँचे जब वो ओर्मस जा रहे थे और एक तुफान में उनकी नाव दमन तट पर पहुँच गयी। इसके बाद यह पूर्तगाली उपनिवेश बना और ४०० वर्षों तक रहा। १६वीं सदी में मुगलों से बचने के लिए मोटीदमन में एक बड़ा दुर्ग बनाया गया क्योंकि इससे पूर्व यहाँ मुगलों का शासन था। यह दुर्ग आज्तक इसके मूल रूप में उपस्थित है। वर्तमान में अधिकतर सरकारी नगरीय कार्यालय दुर्ग के अन्दर स्थित हैं।
दमन को पुर्तगालियों और भारतीयों के मध्य युद्ध के पश्चात् दिसम्बर १९६१ में भारत में शामिल किया गया। इस युद्ध में चार भारतीयों की मौत हो गयी और १४ घायल हुये।; पुर्तगालियों में १० की मौत हो गयी और दो घायल हुये।