माण्डू
माण्डू या माण्डवगढ़, धार ज़िला जिले धार के माण्डव क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन शहर है। यह भारत के पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में स्थित है। यह धार शहर से 35 किमी दूर स्थित है। यह 11 वीं शताब्दी में, माण्डू तारागंगा या तरंगा राज्य का उपभाग था। यहाँ परमारों के काल मे इसे प्रसिद्धि प्राप्त हुई और फिर १३ वीं शताब्दी में, यह क्षेत्र मुस्लिम शासकों के अंतर्गत आ गया।विन्ध्याचल पर्वत शृंखला में स्थित होने के कारण इसका सुरक्षा कि दृस्टि से बहुत अधिक महत्व था।
🏰 मांडू के खंडहर – एक भूला हुआ हिंदू-जैन नगर
मध्य प्रदेश का मांडू आज अपने भव्य खंडहरों और इस्लामी स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है, किंतु इसका इतिहास इससे कहीं पुराना है।
इतिहासकारों के अनुसार, 10वीं–11वीं शताब्दी में मांडू (प्राचीन नाम “मांडवगढ़” या “तरंगगढ़”) हिंदू राज्य के अधीन था। यहाँ के “बूढ़ी मांडू” क्षेत्र में आज भी जैन और हिंदू मंदिरों के अवशेष, शिलालेख, तथा विशाल झीलें उस युग की समृद्ध संस्कृति का प्रमाण देते हैं।
बाद में मध्यकाल में जब मांडू मुस्लिम शासन के अधीन आया, तब नई इमारतों के निर्माण में इन्हीं मंदिरों के खंभों, पत्थरों और सजावटी शिल्पों का पुनः उपयोग किया गया। यही कारण है कि यहाँ की कई मस्जिदें और महल हिंदू-जैन स्थापत्य के तत्वों को समेटे हुए हैं।
संक्षेप में, मांडू का आरंभिक स्वरूप एक समृद्ध हिंदू-जैन नगर के रूप में रहा, जो बाद में इस्लामी स्थापत्य के अद्भुत संगम में रूपांतरित हो गया।
आज यह एक पर्यटक स्थल के रूप मे प्रशिद्ध है। जहाँ हजारों कि संख्या में सैलानी यहाँ के दर्शनीय स्थलों जैसे जहाज महल, हिन्डोला महल, शाही हमाम और वास्तुकला के उत्कृष्टतम उदाहरण आकर्षक नक्काशीदार गुम्बद को देखने आते है। इसकी इन्दौर शहर से दुरी १०० किमी है। सर्वश्रेष्ठ हेरिटेज सिटी का राष्ट्रीय पुरस्कार मांडू को 2018 में प्राप्त हुआ। इस के दर्शनीय स्थल तारापुर दरवाजा जहांगीर दरवाजा दिल्ली दरवाजा जहाज महल हिंडोला महल होशंग शाह का मकबरा जामा मस्जिद अशरफी महल रेवा कुंड रूपमती मंडप नीलकंठ महल हाथी महल तथा लोहानी गुफा है।