Heimatgeschichte · Dewas ·

देवास

देवास

देवास भारत के मध्य प्रदेश राज्य के मालवा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक शहर है। यह पूर्व में सीनियर (बड़ी पाती) और जूनियर (छोटी पाति) नामक दो 15-तोपों की सलामी वाली रियासतों की राजधानी था, जो पवार वंश द्वारा शासित थीं। मराठा साम्राज्य में इस वंश का अतुलनीय योगदान रहा है; इन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज से लेकर छत्रपति शाहू महाराज के काल तक मुगलों, निजामों और पुर्तगालियों के विरुद्ध कई महत्वपूर्ण युद्ध लड़े। इनके शौर्य और निष्ठा के लिए इन्हें 'सेना सप्त सहस्री' और 'विश्वास राव' जैसे प्रतिष्ठित खिताबों से नवाजा गया। वर्ष 1728 में पेशवा बाजीराव प्रथम के साथ मालवा विजय में योगदान देते हुए तुकोजी राव (सीनियर) और जीवाजी राव (जूनियर) ने यहाँ शासन की नींव रखी। यहाँ की टेकरी पर चामुंडा माता और तुलजा भवानी माता के प्रसिद्ध मंदिर हैं और वर्तमान में यह एक प्रमुख औद्योगिक नगर है।
लोक मान्यता है कि यहाँ देवी माँ के दो स्वरूप अपनी जागृत अवस्था में हैं। इन दोनों स्वरूपों को छोटी माँ और बड़ी माँ के नाम से जाना जाता है। बड़ी माँ को तुलजा भवानी और छोटी माँ को चामुण्डा देवी का स्वरूप माना गया है। यहाँ के पुजारी बताते हैं कि बड़ी माँ और छोटी माँ के मध्य बहन का रिश्ता था। एक बार दोनों में किसी बात पर विवाद हो गया। विवाद से क्षुब्द दोनों ही माताएँ अपना स्थान छोड़कर जाने लगीं। बड़ी माँ पाताल में समाने लगीं और छोटी माँ अपने स्थान से उठ खड़ी हो गईं और टेकरी छोड़कर जाने लगीं।
माताओं को कुपित देख माताओं के साथी (माना जाता है कि बजरंगबली माता का ध्वज लेकर आगे और भेरूबाबा माँ का कवच बन दोनों माताओं के पीछे चलते हैं) हनुमानजी और भेरूबाबा ने उनसे क्रोध शांत कर रुकने की विनती की। इस समय तक बड़ी माँ का आधा धड़ पाताल में समा चुका था। वे वैसी ही स्थिति में टेकरी में रुक गईं। वहीं छोटी माता टेकरी से नीचे उतर रही थीं। वे मार्ग अवरुद्ध होने से और भी कुपित हो गईं और जिस अवस्था में नीचे उतर रही थीं, उसी अवस्था में टेकरी पर रुक गईं।
इस तरह आज भी माताएँ अपने इन्हीं स्वरूपों में विराजमान हैं। यहाँ के लोगों का मानना है कि माताओं की ये मूर्तियाँ स्वयंभू हैं और जागृत स्वरूप में हैं। सच्चे मन से यहाँ जो भी मन्नत माँगी जाती है, हमेशा पूरी होती है। इसके साथ ही देवास के संबंध में एक और लोक मान्यता यह है कि यह पहला ऐसा शहर है, जहाँ दो वंश राज करते थे- पहला होलकर राजवंश और दूसरा पँवार राजवंश। बड़ी माँ तुलजा भवानी देवी होलकर वंश की कुलदेवी हैं और छोटी माँ चामुण्डा देवी पँवार वंश की कुलदेवी।
टेकरी में दर्शन करने वाले श्रद्धालु बड़ी और छोटी माँ के साथ-साथ भेरूबाबा के दर्शन अनिवार्य मानते हैं। नवरात्र के दिन यहाँ दिन-रात लोगों का ताँता लगा रहता है। इन दिनों यहाँ माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

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Quelle: Text: Wikipedia – „देवास“, Autorinnen und Autoren (Versionsgeschichte), CC BY-SA 4.0 · Foto: Puneet1984, CC BY 3.0 – Wikimedia Commons