पुनासा: इतिहास
पुनासा का इतिहास प्राचीन पौराणिक काल से लेकर मध्यकालीन राजवंशों और आधुनिक विकास तक विस्तृत है।
पुनासा क्षेत्र का धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास काफी प्राचीन है। धार्मिक मान्यताओं और क्षेत्रीय आख्यानों के अनुसार इस क्षेत्र का उल्लेख 'नर्मदा पुराण' जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। नगर के मध्य में स्थित 'पूर्णेश्वर धाम शिव मंदिर' को पांडव कालीन माना जाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही नर्मदा घाटी सभ्यता और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है।
मध्यकाल में इस क्षेत्र पर तोमर वंश के शासकों का प्रभाव रहा। तोमर राजाओं ने क्षेत्र की सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण के उद्देश्य से यहाँ एक किले का निर्माण कराया था। यह प्राचीन किला आज भी पुनासा के ऐतिहासिक स्थापत्य और मध्यकालीन विरासत का गवाह है।
20वीं सदी के उत्तरार्ध और 21वीं सदी की शुरुआत में पुनासा के इतिहास में एक नया मोड़ आया। नर्मदा नदी पर निर्मित 'इंदिरा सागर जलविद्युत परियोजना' (नर्मदा नगर) के निर्माण ने इस पूरे अंचल के भूगोल और अर्थशास्त्र को बदल दिया। परियोजना के कारण क्षेत्र में सड़कों, परिवहन, व्यापार और प्रशासनिक गतिविधियों का तेजी से विस्तार हुआ।
वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश शासन द्वारा इसे 'नगर परिषद' का दर्जा दिया गया, जिसने पुनासा को एक ऐतिहासिक गाँव से आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया।