राहतगढ़: इतिहास
11 वीं शताब्दी के एक खंडित शिलालेख पर गढ़पेहरा के डांगी वंश के राजा निहालशाह के उपराहद मंडल की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी तो नहीं है, परन्तु कुछ इतिहासकार इसे राहतगढ़ मानते हैं।
कालांतर में गढ़ामंडला राज्य जिसमे 350 गाँव सम्मिलित थे और एक विशाल गढ़ था, के रूप में भी इसका उल्लेख मिलता है। बाद में गौंड़ राजाओं के शासन का यहाँ उल्लेख मिलता है। गोंड शासक संग्रामशाह द्वारा विजित 52 गढ़ो में से राहतगढ़ एक था।
नवाब यार मुहम्मद खान (1726 से 1742) के समय भोपाल राज्य के 'दीवान बीजल राम' ने इसे भोपाल राज्य में मिला लिया।
सन 1799 में एक पिंडारी मुखिया द्वारा राहतगढ़ को लूटा गया। इस लूट का उल्लेख 'मेमोयर ऑफ़ सेन्ट्रल इण्डिया' नाम की एक प्रसिद्द पुस्तक में रोचक ढंग से किया गया है।
इसके बाद यह किला एवं नगर सन 1807 में सिंधिया राज्य में विलय हो गया।
सन 1818 में नगर का प्रबंध अंग्रेजों के अधीन आ गया।
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में राहतगढ़ किला अंग्रेजों के लिए रणनीतिक महत्व का रहा।
=1857 का स्वतंत्रता संग्राम=