शाहगढ़: इतिहास
१५वीं शताब्दी में यह गांव गौंड़ शासकों के अधीन था। तब यह गढ़ करीब ७५० गांवों का था। गौंड़ शासकों के बाद यह छत्रसाल बुंदेला के अधिकार में आया जिसने यहां एक किलेदार तैनात किया था। छत्रसाल ने इसे अपने पुत्र हिरदेशाह के नाम वसीयत कर दिया था। हिरदेशाह की सन् १७३९ में मृत्यु हो गई। हिरदे शाह की मौत के बाद उनके कनिष्ठ पुत्र पृथ्वीराज ने बाजीराव पेशवा की सहायता से इसे अपने अधिकार में ले लिया।
कहा जाता है कि सन् १७५९ में जब अहमदशाह अब्दाली ने भारत पर आक्रमण किया था तो आक्रांताओं के विरुद्ध मराठाओं ने संघर्ष किया। उनके इस संघर्ष में सहायता के लिए शाहगढ़ से ५००० सैनिकों की एक सेना भेजी गई थी। सन् १८३५ में यहां अंग्रेज स्लीमैन आया था। उसने अपनी पुस्तक “रैंबल्स एंड डिक्लेक्शंस” में शाहगढ़ और उसके शासकों के बारे में विस्तार से लिखा है।