चौहटन: इतिहास
इस क्षेत्र का इतिहास सरदार हेमसिंह राठौड़ से जुड़ा हुआ है। जब पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत पर आक्रमण किया तब पहाड़ी इलाका होने के कारण भारतीय सेना पाकिस्तानियों से युद्ध करने पहुंच नहीं पा रही थी। तब एक स्थानीय राजपूत जागीरदार राठौर सरदार हेम सिंह ने पहाड़ियों पर राजपूत और अन्य जातियों के लोगो को एकजुट कर उन्होंने अपने पारंपरिक हथियार धनुष और पुरानी बंदूकों से पाकिस्तानी सेना का डटकर सामना किया । इस घटना में कई राजपूत एवं भील वीर शहीद हो गए लेकिन उन्होंने पाकिस्तानियों को भारत की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया । स्थानीय शिक्षक सुरेश कुमार ने दौड़कर चोकी को सूचित किया और तब वहां भारतीय बल पहुंचा सरदार ठाकुर हेम सिंह ने चोहटन के लिए कई उथान के कार्य किये । ।
चोहटन मे राठौर वंश के राजपूत जागीरदार का शासन रहा
चौहटन एक धार्मिक नगरी है।
चौहटन से 09 किलोमिटर दूर विरात्रा में माँ वाँकल का भव्य मन्दिर
है।यह राजपूतो की भोपा और नेतड जाति की कुलदेवी है तथा साथ ही में केलनोर रोड पर गौराणा माता का मंदिर हैं जो विरात्रा माता का पूर्व(पहले) का रूप हैं
यहां पर चौहटन विधानसभा क्षैत्र से अब्दुल हादी सात बार विधायक रहे तथा वर्तमान में आदूराम मेघवाल विधायक हैं ।
यहां पर चोहटन की पहाड़ियों में महादेव जी का मंदिर है जिसे सुइयों का मंदिर कहा जाता है इस मंदिर की एक विशेषता है कि इसमें सोमवती अमावस्या और सटा नक्षत्र होने पर एक पवित्र जल की धारा निकलती है जिसे बहुत पवित्र माना जाता है यहां पर अनेक प्रकार से साधु संतों का आवागमन होता है यहां पर महंत श्री डूंगरपुरी जी महाराज की समाधि स्थित है यहाँ अर्धकुम्भ का मेला भी भरा जाता हैं
तथा ईसी पहाड़ी पर पवित्र विष्णु पगलिया व पहाड़ी के पीछे वेर माता का मंदिर भी हैं
चौहटन के सुइयां अर्ध कुंभ मेले की बात की जाए तो अभी दिसंबर 2024 में एक भव्य आयोजन हुआ था अगला आयोजन दिसंबर महीने 2027 में इससे भी भव्य आयोजन होगा
चोहटन के कुछ प्रमुख गांव
1 धारासार
2 शोभाला जेतमाल
3 बीजराड़
4 केलनोर
5 उपरला
6 ढोक
7 घोनिया
8 नेेतराड़
9 ईसरोल
10 देदूसर
11 नवातला जेतमाल
12 नवापुरा
13 अरबी की ग़फ़न
14 सोनडी (विष्णू धाम)
15 भलगाव
16 बाखासर
17 बुठ राठौडान
18. कैरनाडा