तारानगर, राजस्थान: तारानगर का इतिहास
तारानगर के गांवों का इतिहास श्री सार्वजनिक पुस्तकालय तारानगर द्वारा प्रकाशित तथा ब्रह्मानंद पारीक व कालू राम पुरोहित बुचावास द्वारा संपादित अर्चना भाग 2 स्मारिका से विस्तृत रूप में पढ़ा जा सकता है।
तारानगर बहुत पुराना शहर है और अपने मंदिरों, प्राचीन हवेलियों, उनके अंदर की पेंटिंग और छतरियों के लिए प्रसिद्ध है। हवेलियों के अंदर लकड़ी का काम बेहतरीन है।
शहर का सबसे प्रसिद्ध मंदिर जैन मंदिर है जो 942 ई. में बना था । इसमें जैन तीर्थकरों की बहुत पुरानी मूर्तियाँ और उससे जुड़ा इतिहास है।
महाभारत काल का तारानगर का श्याम पांडिया मंदिर एक प्रसिद्ध मंदिर है । इसका इतिहास द्वापर युग से भी पुराना है । कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में विजय के बाद युधिष्ठिर के तिलक समारोह के लिए कुंती पुत्र भीम मंदिर के पुजारी श्याम पांडिया को बुलाने आए थे ।
साहवा तारानगर का एक प्रमुख गांव है, साहवा को गुरुद्वारा के कारण ऐतिहासिक महत्व प्राप्त है, जहां मान्यता है कि 10वें सिख गुरु - गुरु गोविंद सिंह आए थे।
साहवा अपने पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) उद्योग के कारण भी बहुत लोकप्रिय है।
चूरु मण्डल मे जैन धर्म
चूरु मण्डल मे जैन धर्म की विद्यमानतका प्रथम संकेत (रिणी) तारानगर के जैन मंदिर से मिलता है जो विक्रम की 10 वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों मे बना माना जाता है। प्राचीन फोगपत्तन (फोगां, तहसील सरदारशहर) भाड़ंग (तहसील तारानगर) जो अब गांव मात्र रह गया है। ये संभवत: जैन धर्म के प्राचीन मुख्य स्थान हैं ।