चैल, हिमाचल प्रदेश: इतिहास
1891 में, पटियाला के राजिन्दर सिंह की लॉर्ड किचनर से अनबन हो गई। परिणामवश उसने उनके भारत की (तत्कालीन) ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। महाराजा इससे क्रोधित हुए, और उन्होंने स्वयं के लिए एक नया समर रिट्रीट बनाने का इरादा किया। इसलिए उन्होंने अपनी आवश्यकता-अनुसार जगह (चैल) का पुनर्निर्माण किया। भारतीय संघ में प्रवेश के बाद, पटियाला के महाराजा ने अपनी अधिकांश इमारतों को चैल मिलिट्री स्कूल और भारत सरकार को दान कर दिया।