देवबन्द: इतिहास व धार्मिक महत्व
देवबंद एक प्रागैतिकहासिक नगर है, जिसकी कहानी मानव सभ्यता के अतीत से शुरु होती है। देवबंद में त्रिपुर बाला सुंदरी देवी का मंदिर भी है माँ त्रिपुरा बल सुंदरी देवी मंदिर के द्वार पर लगा शिलालेख अज्ञात काल का कहा जाता है इसको आज तक नहीं पढ़ा जा सका है देवबंद के बारे में यह प्रसिद्ध है कि यहाँ घने जंगल थे और छोटी छोटी झोपड़िया थी देवबंद में राधावल्लभ का ऐतिहासिक मंदिर भी है।
सन् 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद यहाँ मदरसा दारुल उलूम देवबंद की स्थापना हुई जो प्रसिद्ध है। विभाजन के बाद पंजाबी समुदाय और सिक्ख समुदाय के लोग भी देवबंद में आकर बस गए। पंजाबी समुदाय की तादाद कम है और सिक्खों की तादाद तो बस गिनती की ही है। रेलवे रोड पर एक गुरूद्वारा भी है।
ईसाईयों की गिनती बहुत थोड़ी है। सभी लोग एक दूसरे के साथ सद्भावना के साथ रहते हैं और एक दूसरे की ख़ुशी और ग़म में शिरकत भी करते हैं।