मिल्कीपुर: इतिहास
मिल्कीपुर नगर की स्थापना पासी जाति के मलिक नाथ पासी ने की थी जो प्राचीन काल में कभी यहाँ पर रहा करते थे और उन्हीं के नाम पर इस नगर का नाम मिल्कीपुर पड़ा। भर पासी एक हिंदू की एक जाति है जो मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में पाई जाती है। थोड़ी संख्या में पासी जाति के लोग पाकिस्तान के कराची शहर में भी पाए जाते हैं। लोग मुख्य रूप से लेखक, या प्रशाशनिक अधिकारी होते थे कुछ लोगों को मुंशी या चपरासी का काम भी दिया गया था। मिल्कीपुर का इतिहास पर्यटन स्थल के रूप मे भी जाना जाता जिसमे प्रमुख रूप से त्रेता युग से जुडा हुआ है जब राजा दषरथ सरयू किनारे शिकार के लिए निकले थे तब श्रवण को अपना शिकार समझ अनजाने मे बाण चला दिया था श्रवण कुमार अपने माता पिता को मिल्कीपुर क्षेत्र के बारुण बाजार से पश्चिमी अंधा आंधी आश्रम पर बैठाकर पानी लाने गाएं थे जो आज भी आस्था का केन्द्र है। तथा इस क्षेत्र मे अगस्त मुनि की कुटी भी आस्तीकन बाजार मे स्थित है , आस्तिकन से सटकर ही यमदग्नि का भी स्थान है जिसका उल्लेख शास्त्रों में भी है। तथा "मलिक नाथ पासी "महान शिव भक्त और माता दुर्गा के भक्त थे। इन्हीं पासी राजा मलिक नाथ के नाम से इसका नाम मलिकपुर तथा बाद में मिल्कीपुर पड़ा।