सण्डीला: इतिहास
ब्रिटिशकालीन Gazetteer of the Province of Oudh, Volume III (1878) के अनुसार संडीला परगना के प्रारंभिक इतिहास में अर्कवंशी (अरख/Arakh) समुदाय का महत्वपूर्ण स्थान था। गज़ेटियर में उल्लेख है कि स्थानीय परंपरा के अनुसार अर्कवंशी (अरख) समुदाय के दो भाई सलहिया और मलहिया इस क्षेत्र के प्रमुख शासक थे। इनमें सलहिया द्वारा सलहियापुर, जो आगे चलकर संडीला कहलाया, तथा मलहिया द्वारा मलिहाबाद की स्थापना किए जाने का उल्लेख मिलता है।
गज़ेटियर के अनुसार अर्कवंशी (अरख) शासकों का संडीला तथा उसके आसपास के विस्तृत भूभाग पर कई पीढ़ियों तक अधिकार रहा। इस स्रोत में कहा गया है कि उनका शासन 14वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक बना रहा। इसके बाद दिल्ली सल्तनत के शासनकाल में सैयद मखदूम अलाउद्दीन ने संडीला पर अभियान चलाया और युद्ध के बाद इस क्षेत्र पर सल्तनत का अधिकार स्थापित हुआ। गज़ेटियर में यह भी उल्लेख है कि इस संघर्ष की स्मृति लंबे समय तक स्थानीय परंपराओं में बनी रही तथा उतरौला के अरख अपने पूर्वजों के संडीला पर अधिकार का स्मरण करते थे।
इसी गज़ेटियर में यह भी दर्ज है कि स्थानीय परंपरा के अनुसार अरख (अर्कवंशी) इस क्षेत्र के सबसे प्राचीन निवासियों में माने जाते थे। ब्रिटिश प्रशासन ने संडीला के प्रारंभिक इतिहास का वर्णन करते हुए अरख समुदाय को इस क्षेत्र के आरंभिक राजनीतिक इतिहास से जोड़ा है।
बाद के ब्रिटिशकालीन अभिलेखों, जैसे Regular Settlement of Hardoi District (1880) तथा The Tribes and Castes of the North-Western Provinces and Oudh में भी अरख समुदाय का उल्लेख मिलता है। इन स्रोतों में संडीला और उसके आसपास के क्षेत्रों में अरखों की ऐतिहासिक उपस्थिति का वर्णन किया गया है।
संदर्भ
Gazetteer of the Province of Oudh, Vol. III (N–Z), Government Press, 1878, pp. 300–301.
Regular Settlement of Hardoi District, 1880.
William Crooke, The Tribes and Castes of the North-Western Provinces and Oudh, Vol. I, 1896.