बेरीनाग: इतिहास
बेरीनाग ऐतिहासिक तौर पर गंगोली क्षेत्र के अंतर्गत माना जाता है। यहाँ तेरहवीं शताब्दी से पहले कत्यूरी राजवंश का शासन था। तेरहवीं शताब्दी के बाद यहाँ मनकोटी राजाओं का शासन स्थापित हो गया, जिनकी राजधानी मनकोट में थी। सोलहवीं शताब्दी में कुमाऊँ के राजा बालो कल्याण चन्द ने मनकोट पर आक्रमण कर गंगोली क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। इसके बाद यह क्षेत्र 1790 तक कुमाऊँ का हिस्सा रहा। 1790 में गोरखाओं ने कुमाऊँ पर आक्रमण कर कब्ज़ा कर लिया, और फिर 1815 के गोरखा युद्ध में गोरखाओं की पराजय के बाद यहाँ अंग्रेज़ों का कब्ज़ा हो गया।
अंग्रेजी शासन काल में यहाँ चाय के कई बागान स्थापित किये गए। लगभग दो सदियों तक, बेरीनाग और चौकोरी में कई हेक्टेयर क्षेत्र में चाय के बागान फैले हुए थे। 1864 में, ये बागान थॉमस मैकिंस और एडवियरस स्लेनेगर स्टेपॉर्ड के थे, जो ब्रिटेन में पंजीकृत एक कंपनी थी। 1869 में ये "कुमाऊँ-अवध प्लांटेशन कंपनी" के स्वामित्व में आये, और उसके बाद जेम्स जॉर्ज स्टीवेन्सन, ने एक पंजीकृत बिक्री पत्र द्वारा इन्हें खरीद लिया। 1919 में यह भूमि ठाकुर देव सिंह बिष्ट और चंचल सिंह बिष्ट ने खरीदी थी। 1964-65 में इस क्षेत्र में कुल 9,667 नाली (195.4 हेक्टेयर) क्षेत्र में चाय के बागान फैले हुए थे।
80-90 के दशकों में इन बागानों में चाय का उत्पादन समाप्त सा हो गया और फिर धीरे धीरे एक पूरे शहर ने यहां आकार ले लिया। बेरीनाग क्षेत्र राईआगर और उडियारी के माध्यम से आस-पास के अधिकतर हिस्सों से जुड़ा हुआ था, और इसी कारण 2004 में डीडीहाट तहसील के 298 गांवों को स्थानांतरित कर बेरीनाग तहसील का गठन कर दिया गया। 2014 में नगर के केंद्र से होकर जाने वाली सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित हो गयी; राष्ट्रीय राजमार्ग 309ए नामक यह राजमार्ग बेरीनाग को अल्मोड़ा, बागेश्वर और गंगोलीहाट से जोड़ता है।