रुड़की: इतिहास
रूड़की का प्रारंभिक राजनीतिक व प्रशासनिक इतिहास:
रूड़की का सर्वप्रथम उल्लेख ब्रिटिश अभिलेखों में मिलता है। ब्रिटिश अभिलेखों के अनुसार 18वीं सदीं में रूड़की सोलानी नदी के पश्चिमी तट पर तालाब की मिट्टी से निर्मित कच्चे मकानों, भवनों का गांव हुआ करता था यहां कोई भी पक्का मकान या भवन नहीं था ।
उस समय यह गांव प्रशासनिक रूप से तात्कालिक सहारनपुर जिले के गौचरो का लंढौरा जो पूर्व मुगल सूबेदार नजीब खान रोहिल्ला के प्रति वफादारी के बदले गौचरो को एक छोटी सी जमीदारी बक्सी गई थी का एक भाग था। सन् 1813 ई० में लंढौरा के गौचर रामदयाल सिंह की मृत्यु के बाद उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाते हुए अंग्रेजों ने भू-अभिलेखों में एक हिस्सा खानाखाली दर्शाकर रूड़की सहित कई गांव और हिस्से से बाहर कर दिए और उन्हें ब्रिटिश शासन में मिला लिया, इस प्रकार 1813 में रूड़की पूरी तरह से ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया।
रूड़की तहसील की स्थापना :
1826 के आसपास जनपद सहारनपुर की ज्वालापुर तहसील का मुख्यालय ज्वालापुर से रूड़की स्थानांतरित कर दिया गया और ज्वालापुर तहसील समाप्त कर रूडकी को परगना सहित तहसील बना दिया गया जिसका प्रभार एक ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रैंक के अधिकारी को सौंपा गया साथ ही एक कोषागार अधिकारी व तहसीलदार को नियुक्त किया गया, इसके साथ ही रूड़की में एसडीएम आवास, कोषागार, तहसीलदार आवास का भी निर्माण किया गया।
रूड़की नगर में सन् 1869 ई. में ही नगर पालिका बोर्ड की स्थापना कर दी गई थी।
रूड़की छावनी एवं बंगाल सैपर्स की स्थापना :
अंग्रेजों ने गुर्जरो की गंगा- यमुना के दोआब में लगातार बढ़ती जा रही ताकत को कमजोर करने व साथ ही नजीबाबाद क्षेत्र के रूहेलाओं को अपने नियंत्रण में लाने के उद्देश्य से लंढौरा के निकट 10 किलोमीटर पश्चिम में रूड़की गांव में 1803 ई० में एक छोटी सैन्य छावनी की स्थापना की।
जिसका उपयोग 1822 से 1824 ई० में गुजरात-सहारनपुर के ताल्लुका व गुर्जर किले कुंजा बहादुरपुर के ताल्लुकेदार चौधरी विजय सिंह जो राजा विजय सिंह के नाम से प्रसिद्ध है, उनके नेतृत्व में लड़े गए पहले स्वतंत्रता संग्राम जो 1824 की 'गुर्जर क्रांति' के रूप में जानी जाती है, जिसे स्थानीय जनता के साथ ही दोआब व हरियाणा की रियासतो व जमीदारों का व्यापक समर्थन हासिल था। जिसके दमन के पश्चात इस घटना को अंग्रेज अधिकारियों ने सरकारी दस्तावेजो व अभिलेखों में 1824 का "गूजर विद्रोह" के नाम से स्थान प्रदान किया एवं 1857 की क्रांति में गुजरात सहारनपुर के गुर्जरों, रांघड़ो व किसानों द्वारा किए गये भयंकर विद्रोहों को कुचलने के लिए किया गया।
07 नवंबर,1853 में यहां बंगाल सैपर्स एंड माइनर्स की स्थापना की गई। जिसने क्रांति के दौरान इस क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाये रखने में अपनी काबिलियत व महत्वता सिद्ध की। इसके साथ ही रूड़की छावनी में सेना की इंफैन्टरी रेजीमेंट लंबे समय तक तैनात रही जिसके स्थान पर बाद में सेना के तोपखाना "रॉयल गैरीसन आर्टिलरी" की दो कंपनियो (हैवी बैट्रीज़ ऑफ आर्टिलरी) की तैनाती छावनी में कर दी गई ।
रूड़की का ढांचागत विकास:
क्षेत्र की जनता व किसानों द्वारा आजादी के लिए किए गए विद्रोहों व संघर्षों से उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता व अशांति को पूरी तरह नियंत्रित करने के पश्चात रूड़की के महत्व को देखते हुए इसके ढांचागत विकास के प्रयास प्रारंभ हुए जिनमें ऐतिहासिक गंगानहर का निर्माण व रूड़की इंजीनियरिंग कालेज की स्थापना प्रमुख थी।
अप्रैल 1842 में अंग्रेज अधिकारी सर प्रोबे कोटले के नेतृत्व में गंगनहर निर्माण हेतू खुदाई प्रारंभ की गई तथा गंगनहर के निर्माण कार्य व रखरखाव के लिए 1845-46 में नहर के किनारे कैनाल वर्कशॉप व फाउंड्री फोर्ज की स्थापना की गई। जिससे रूडकी के ढांचागत कायाकल्प के विकास को एक नई गति मली।
रूड़की गंगानहर का निर्माण कार्य 1854 ई. …