भारत – सिंधु घाटी सभ्यता से विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र तक
भारतीय उपमहाद्वीप में मानव सभ्यता का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। लगभग पाँच हज़ार वर्ष पहले सिंधु घाटी में हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे सुनियोजित नगर बसे। इसके बाद वैदिक काल आया, जिसमें संस्कृत साहित्य और हिंदू परंपराओं की नींव पड़ी; इसी भूमि पर बौद्ध और जैन धर्म का भी उदय हुआ। मौर्य साम्राज्य, विशेषकर सम्राट अशोक के शासन में, उपमहाद्वीप का बड़ा हिस्सा एक सत्ता के अधीन रहा, और गुप्त काल को विज्ञान, कला और साहित्य का स्वर्ण युग माना जाता है।
मध्यकाल में दक्षिण में चोल जैसे शक्तिशाली राजवंश रहे, जबकि उत्तर में दिल्ली सल्तनत और फिर सोलहवीं शताब्दी से मुग़ल साम्राज्य स्थापित हुआ, जिसकी विरासत में ताजमहल जैसी इमारतें शामिल हैं। अठारहवीं शताब्दी में मुग़ल सत्ता कमज़ोर होने पर मराठा और अन्य क्षेत्रीय शक्तियाँ उभरीं, और ईस्ट इंडिया कंपनी ने धीरे-धीरे अपना प्रभुत्व फैलाया। 1857 के विद्रोह के बाद भारत सीधे ब्रिटिश ताज के अधीन आ गया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन ने स्वतंत्रता संग्राम को जन आंदोलन बना दिया। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, परंतु विभाजन के साथ भीषण हिंसा हुई और बहुत बड़े पैमाने पर लोग विस्थापित हुए। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ भारत गणराज्य बना। तब से देश ने लोकतांत्रिक चुनावों, हरित क्रांति और 1991 के आर्थिक सुधारों के माध्यम से गहरा परिवर्तन देखा है।
आज भारत अपनी भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों की अद्भुत विविधता तथा तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से पहचाना जाता है।
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