पुणे: इतिहास
आठवी शताब्दी मे पुणे को "पुन्नक " नाम से जाना जाता था। शहर का सबसे पुराना वर्णन ई.स. 758 का है, जब उस काल के राष्ट्रकूट राज मे इसका उल्लेख मिलता है। मध्ययुग काल का एक प्रमाण जंगली महाराज मार्ग पर पाई जाने वाली पातालेश्वर गुफा है, जो आठ्वी सदी की मानी जाती है। 17वीं शताब्दी मे यह शहर निजामशाही, आदिलशाही, मुगल ऐसे विभिन्न राजवंशो का अंग रहा। सतरहवी शताब्दी में शहाजीराजे भोसले को निजामशाहा अहमदनगरने पुणे की जमीनदारी दी थी। इस जमींदारी मे उनकी पत्नी जिजाबाई ने ई.स. 1627 में शिवनेरी (जुन्नर किला)किले पर छत्रपति शिवाजीराजे भोसले को जन्म दिया। शिवाजी महाराज ने अपने साथियों के साथ पुणे परिसर में मराठा साम्राज्य की स्थापना की। इस काल मे पुणे में शिवाजी महाराज का वर्चस्व था। आगे पेशवा के काल मे ई.स. 1749 सातारा को छत्रपति की गद्दी और राजधानी बना कर पुणे को मराठा साम्राज्य की 'प्रशासकीय राजधानी' बना दी गई। पेशवा के काल मे पुणे की काफी तरक्की हुई। ई.स. 1818 तक पुणे मे मराठों का राज्य था।
पुणे छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन व मराठा साम्राज्य के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अंग है। ई.स. 1635-36 के दरमयान जब जिजाबाई व शिवाजी महाराज पुणे आवास के लिए आए, तबसे पुणे के इतिहास में एक नए पर्व का जन्म हुआ। शिवाजी महाराज व जिजामाता पुणे में लाल महल मे रहते थे। पुणे के ग्रामदेवता- कसबा गणपती की स्थापना जिजाबाई ने की थी।
17वीं शतब्दी के प्रारम्भ में, छत्रपती शाहू के प्रधानमन्त्री, थोरले बाजीराव पेशवे को पुणे को अपना स्थाई आवास बनाना था। छत्रपति शाह महाराज ने इसकी अनुमति दी व पेशवा ने मुठा नदी के किनारे शनिवार वाड़ा बनाया।
खरडा इस ऐतिहासिक किले पर मराठों एवं निज़ाम के बीच ई.स. 1795 के बीच युध्द हुआ। ई.स. 1817 को पुणे के पास खडकी ब्रिटिश व मराठों में युध्द हुआ। मराठो को इस युद्ध में पराजय का सामना करना पड़ा व ब्रिटिश ने पुणे को अपने कबजे में कर लिया। ब्रिटिश ने पुणे के महत्व को समझते हुए शहर के पूर्व मे खडकी कँटोन्मेंट (लष्कर छावनी) की स्थापना की। ई.स. 1858 में पुणे महानगरपालिका की स्थापना हुई। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पुणे मे अनेक नामांकित शिक्षण संस्थाओ की स्थापना हुई।
भारतीय स्वातन्त्रा संग्राम में पुणे के नेताओं और समाज सुधारकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। महात्मा ज्योतिबा फुले और सावरकर जैसे नेताओं के कारण पुणे राष्ट्र के नक्शे पर अपने महत्व को दर्शाता रहा। महादेव गोविन्द रानडे, लोकमान्य टिळक, रा.ग. भाण्डारकर, विठ्ठल रामजी शिन्दे, गोपाल कृष्ण गोखले, लोखण्डे जैसे समाजसुधारक व राष्ट्रीय ख्याती के नेता पुणे से थे।