बलिया जिला: इतिहास
वीर लोरिक का इतिहास बलिया ज़िले से जुड़ा हुआ है और उनकी वीरता के बारे में ये कहा गया है कि उन्होंने अपनी तलवार से ही पत्थर को दो हिस्सों में अलग अलग कर दिया था। आज भी वह पत्थर सोनभद्र जिले में वीर लोरिक पत्थर के नाम से मौजूद है। वीर लोरिक 10वीं सदी के यदुवंशी क्षत्रिय थे जो महान योद्धा, कुशल सेनानायक और रणनीतिकार थे।
बलिया 1 नवम्बर सन् 1879 में गाजीपुर से अलग हुआ। लगातार अशान्त रहने के कारण अग्रेजों ने इसे गाजीपुर से अलग कर दिया। 1942 के आंदोलन में बलिया के निवासियों ने स्थानीय अंग्रेजी सरकार को उखाड़ फेंका था। चित्तू पांडेय के नेतृत्व में कुछ दिनों तक स्थानीय सरकार भी चली, लेकिन बाद में अंग्रेजों ने वापस अपनी सत्ता कायम कर ली।भारत के पूर्व प्रधान मन्त्री चन्द्रशेखर भी इसी जिले के मूल निवासी थे। आपात काल के बाद हुई क्राति के जनक तथा महान स्वतंत्रता सेनानी (दुर्गा प्रसाद गुप्त) जयप्रकाश नारायण भी इसी जिले के मूल निवासी थे। समाजवादी चिंतक तथा देश में 'छोटे लोहिया' के नाम से विख्यात जनेश्वर मिश्र भी यही के निवासी थे।बलिया को "बागी बलिया" के नाम से भी जाना जाता है।