महराजगंज जिला
महराजगंज भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय महराजगंज है। यह भारत-नेपाल सीमा के समीप स्थित है। इसका ज़िला मुख्यालय महराजगंज शहर स्थित है। पहले इस जगह को 'कारापथ' के नाम से जाना जाता था। यह ज़िला नेपाल के दक्षिण, गोरखपुर ज़िले के उत्तर, कुशीनगर ज़िले के पश्चिम सिद्धार्थनगर के पूर्व व सन्त कबीर नगर ज़िले के उत्तर-पूर्व में स्थित है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह काफ़ी महत्वपूर्ण स्थल है। कई शोध के अनुसार इसी ज़िले के नौतनवा तहसील के अंतर्गत ग्राम बनरसिया कला में भगवान बुद्ध का ननिहाल भी है। गोरखपुर से नरकटियागंज जाने वाले रेल मार्ग से कप्तानगंज जंक्शन, जो कुशीनगर ज़िले में स्थित है, के आगे एक छोटा-सा रेलवे स्टेशन, ख़ुशहालनगर है। फिर घुघली से सिसवा बाज़ार और ज़िले में इस रूट पर गुरली राम गढ़वा स्टेशन है। गोरखपुर से फरेंदा व नौतनवा तक रेल मार्ग पर गाड़ियाँ चलती है। अब घुघली से सीधे महराजगंज को रेल मार्ग से जोड़ने का काम जारी है, जो फरेंदा से जुड़ जाएगा। घुघली के पूरब छोटी गण्डक बहती है, जो नारायणी नदी से निकलती है। इस पर बैकुंठी घाट है, आगे नौ किलोमीटर दूर बाला बाबा घाट है और उसके आगे कुशीनगर ज़िले में यह गण्डक नदी प्रवेश करती है। सिसवा से कप्तानगंज तक दक्षिण वाहिनी होती हुई नदी महराजगंज और कुशीनगर के जनपद का विभाजन करती है।
= इतिहास =
2 अक्टूबर 1989 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म दिन के पावन पर्व पर अस्तित्व में आने वाले महराजगंज जनपद के इतिहास की रूपरेखा पुनर्गठित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। प्राचीन भारतीय साहित्य में इस क्षेत्र का कम ही उल्लेख हुआ हैं ऐसी स्थिति में तर्कपूर्ण अनुमान का आश्रय लेते हुए उपलब्ध साहित्यिक एवं पुरातात्विक स्त्रोतों की सम्यक समीक्षा के उपरान्त इस जनपद का इतिहास निर्विवाद रूप से प्रस्तुत कर पाना असंभव है। फिर भी इसके गौरवशाली अतीत के पुनर्निमाण का प्रयास इस लेख का अभीष्ठ है।
महाकाव्य - काल में यह क्षेत्र कारपथ के रूप में जाना जाता था, जो कोशल राज्य का एक अंग था। ऐसा प्रतीत होता है कि इस क्षेत्र पर राज्य करने वाले प्राचीनतम सम्राट इक्ष्वाकु थे, जिनकी राजधानी अयोध्या थी। इक्ष्वाकु के उपरान्त इस राजवंश को अनेक छोटे-छोटे राज्यों में बाँट दिया और अपने पुत्र कुष को कुषावती का राजा बनाया, जिसकी आधुनिक समता कुशीनगर के साथ स्थापित की जाती है। राम के संसार त्याग के उपरान्त कुष ने कुषावती का परित्याग कर दिया और अयोध्या लौट गये। वाल्मीकि रामायण से ज्ञात होता कि मल्ल उपाधिकारी लक्ष्मण पुत्र चन्द्रकेतु ने इसके उपरान्त इस सम्पूर्ण क्षेत्र के शासन सूत्र का संचालन करना प्रारम्भ किया।
महाभारत में वर्णित है कि युधिष्ठिर द्वारा सम्पादित राजसूय यज्ञ के अवसर पर भीमसेन को पूर्ववर्ती क्षेत्रों को विजित करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया था। फलतः भीमसेन ने गोपालक नामक राज्य को जीत लिया। जिसके बाँसगाँव स्थित गोपालपुर के साथ स्वीकृत क …