भिवानी जिला: इतिहास
भिवानी के सबसे पुराने गांव में एक नाम काैंट गांव का भी आता है जो भिवानी से ३ किलोमीटर दूर स्थित है। जहां के लोग बहुत ही सभ्य और संस्कारी हैं। भिवानी जिले की नीव इसी गांव से निकले एक व्यक्ति द्वारा की गई थी। जो आज भिवानी के नाम से जाना जाता है।
भिवानी के एक गाँव, मिताथल में की गयी खुदाई से प्राप्त प्रमाण बताते हैं कि यह स्थान हडप्पा संस्कृति के समय से ही आबाद था। भिवानी के समीप नौरंगाबाद गाँव में की गयी खुदाई के दौरान प्राप्त वस्तुएं लगभग ढाई हज़ार साल पुरानी हैं। आइन-ए-अकबरी में भिवानी शहर का ज़िक्र मिलता है।सिंधु घाटी सभ्यता की खान, तोशाम और मकानों को तोशाम हिल रेंज की खानक पहाड़ियों पर पाया गया है।
खुदाई (1968–73 और 1980-86) भिवानी के मिताथल गाँव में, पूर्व-हड़प्पा और पूर्व के साक्ष्य का पता लगाया गया है। क्षेत्र में हड़प्पा (सिंधु घाटी सभ्यता) संस्कृति। भिवानी शहर से लगभग 10 किलोमीटर (6.2 मील) पूर्व में, नौरंगाबाद गाँव के पास, 2001 में प्रारंभिक खुदाई में सिक्कों, औज़ारों, खिलौनों, मूर्तियों और बर्तनों समेत 2,500 साल पुरानी कलाकृतियों का पता चला था। पुरातत्वविदों के अनुसार, सिक्कों, सिक्कों के टुकड़ों, मूर्तियों और घरों के डिजाइन की उपस्थिति से पता चलता है कि 300 ई.पू. तक कुषाण, गुप्त और यौधेय काल में कभी-कभी यहाँ एक शहर मौजूद था। भिवानी शहर का उल्लेख आइन-ए-अकबरी में किया गया है और यह मुगलों के समय से वाणिज्य का एक प्रमुख केंद्र रहा है।