बैतूल ज़िला: इतिहास
बैतूल का खेरला प्राचीन चार महान गोंड राज्य में से एक था यहां 130 ईस्वी से160 ईस्वी तक कोंडाली नामक गोंड राजा का राज्य था। बाद में मराठाओं ने यह जिला 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया। 1826 में विधिवत रूप से यह ब्रिटिश अधिकार में चला गया। 1861 में यह सागर और नर्मदा प्रांत में चला गया। बैतूल जिला नर्मदा संभाग के अंतर्गत आता था। ब्रिटिश सेना ने मुलताई में छावनी बनाई थी। बैतूल और शाहपुर मराठा शासक अप्पा साहब के शासन से अलग हो गई थी। मराठा जनरल और सेना जून 1862 में बैतूल में रही।
जिले के मुलताई शहर से ताप्ती का उदगम हुआ है। इसको पवित्र माना जाता है। और उनका प्रसिद्ध ताप्ती मंदिर भी यहां है।
बेैतुल ही वो पहला जिला था जिसमे ९ मार्च को कवि दिवस के रूप मे मनाना प्रारम्भ किया गया था।