गोड्डा जिला
गोड्डा ज़िला भारत के झारखण्ड राज्य का एक जिला है। इसका मुख्यालय गोड्डा है।
गोड्डा जिला 17 मई, 1983 को पुराने संथाल परगना जिले से बाहर बनाया गया था।
गोड्डा की औसत ऊंचाई 77 मीटर (252 फीट) है। गोड्डा 25 मई 1983 को अविभाजित बिहार के 55 वें जिले के रूप में अस्तित्व में आया। 15 नवंबर 2000 को बिहार में झारखंड राज्य के विभाजन के बाद, यह एक 18 बा जिला के रूप में स्तापित हुआ । राष्ट्रीय राजमार्ग 133 (NH-133) गोड्डा शहर से होकर गुजरता है।
गोड्डा जिले का इतिहास पाषाण युग से सबंधित है। हथौड़ों, अक्ष, तीर-कमान , कृषि उपकरण इत्यादि, विशेष रूप से संथाल परगना में इस क्षेत्र में पत्थर के हथियारों का एक बड़ा हिस्सा पाया गया है। हालांकि राज्य में उचित ऐतिहासिक दस्तावेजों की कमी है। विभिन्न साक्ष्य यह भी कहते हैं कि जिले में वैदिक काल के दौरान भी सभ्यता थी।
गोड्डा ज़िला का पर्यटन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत:
• गोड्डा से पथरगामा 2 किमी दूर है योगिनी शक्ति पीठ का मंदिर हैं । कहते हैं कि यहां देवी सती की जांघ गिरी थी। इसलिए यहां पर मंगलवार और शनिवार को हजारों लोग आकर पूजा करते हैं।
• बसंत राय एक बड़ा टैंक है, जिसे राजा बसंत राय ने बनवाया था। कहा जाता है कि 50 एकड़ में बने इस टैंक को कोई तैरकर, हाथी या नाव से पार नहीं कर पाया। लोग इसके पानी को चमत्कारिक मानते हैं।
• सुंदर नदी पर बना सुंदर बांध भी पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है। इसका निर्माण 1970 से 78 के बीच किया गया था।
अदानी पावर गोड्डा में अपना 1600 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट स्थापित कर रहा है।