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कोच्चि: इतिहास

कोच्चि: इतिहास

कोची भारतीय मसाला व्यापार का केन्द्र कई शताब्दियों से रहा है, जिसकी जानकारी यवनों (प्राचीन यूनानियों एवं रोमवासियों) के साथ साथ यहूदियों, सीरियाइयों, अरबों तथा चीनियों को प्राचीन काल से ही थी। कोची का महत्त्व १३४१ में पेरियार नदी में आयी बाढ़ के कारण कोदुंगलूर (क्रैंगनोर) के निकटस्थ मुज़िरिस बंदरगाह के नष्ट होने के बाद से बहुत बढ़ गया था। कोची के सबसे पुराने ज्ञात उल्लेख चीनी यात्री मा हुआन की एडमिरल ज़ेंग हे के अधीन की गई उनकी १५वीं शताब्दी की यात्राओं के वर्णन में मिलता है। १४४० में यहां आये इतालवी यात्री निक्कोलो दा कॉण्टी ने भी कोची शहर का उल्लेख अपने वृत्तान्तों में किया है।
इतिहासविदों के अनुसार कोची राज्य का मूल राज्य १२वीं शताब्दी में चेर वंश के पतन उपरांत ही यहां अस्तित्त्व में आगया था। इस राज्य का अधिकार वंशानुगत था और इन्हें स्थानीय लोगों द्वारा पेरम्पदप्पु शासक कहा गया था। कोची की मुख्यभूमि १८वीं शताब्दी तक इस राज्य या रजवाड़ेकी राजधानी बनी रही तथा कोची का राजा ही वर्तमान कोच्चि नगर क्षेत्र तथा निकटवर्त्ती क्षेत्रों पर अधिकार रखता था। हालांकि बाद के काफ़ी समय से राज्य में विदेशी आधिपत्य रहा एवं राजा को केवल नाममात्र का अधिकार प्राप्त रहा था। पुर्तगाली अन्वेषक पैड्रो अल्वरेज़ कैब्राल ने भारत में प्रथम यूरोपीय उपनिवेश १५०० में कोची में बसाया। १५०३ से १६६३ तक, फ़ोर्ट कोच्चि (फ़ोर्ट ईमैन्युअल) पुर्तगाली साम्राज्य के अधीन रहा। ये पुर्तगाली आधिक्पत्य-काल सेंट थोमस ईसाइयों एवं कोचीन यहूदियों के लिये बेहद विपत्ति काल रहा, क्योंकि तत्कालीन पुर्तगाल-अधीन भारत में साम्राज्य आधिपत्य विवाद आदि बढ़ रहे थे। कोची में प्रथम पुर्तगाली अन्वेषक वास्को डा गामा की कब्र भी बनी हुई है, जिसने भारत की खोज हेतुप्रथम सफ़ल अभियान किया था। उसे सेंट फ़्रांसिस गिरजाघर में दफ़नाया गया था। बाद में उसके अवशेष १५३९ में पुर्तगाल लौटा दिये गए। पुर्तगाली शासन के बाद यहा डच शासन आया, जिन्हों ने यहां के स्थानी कालीकट के ज़मोरिन के साथ संधि कर कोची पर आक्रमण किया व अधिकार कर लिया था। १७७३ में मैसूर राज्य के शासक हैदर अली द्वारा अपने राज्य के मालाबार क्षेत्र में विस्तार के अन्तर्गत्त कोची पर अधिकार कर उसे मैसूर के अधीन कर लिया गया था। इस समय तक कोची की वंशानुगत प्रधानमंत्री पालियथ अचान भी पदच्युत हो गए।
इसी बीच डच लोगों ने यूनाइटेड डच प्रोविन्स पर युद्ध की आशंका के चलते, १८१४ की आंग्र-डच संधि कर ली, जिसके अन्तर्गत्त कोची को बांग्का द्वीप के बदले संयुक्त राजशाही के अधीन दे दिया गया। वैसे इस संधि के पूर्व में भी यहां ब्रिटिश उपस्थिति के साक्ष्य मिलते हैं।
१८६६ में फ़ोर्ट कोच्चि नगर पालिका बन गया, और इसका प्रथम म्युनिसिपल काउन्सिल ईटिंग कान्टेस्ट १८८३ में आयोजित हुआ। १८९६ में कोचीन के महाराजा ने एर्णाकुलम एवं मट्टनशेरी में दो अन्य परिषदों के गठन कर स्थानीय प्रशासन का आरम्भ किया। १९०७ में मद्रास प्रेसिडेन्सी के तत्कालीन राज्यपाल (गवर्नर) सर अर्थर लॉली, उनके भ्राता बेल्बी लॉली, मद्रास गवर्नर (१८९१-९६) कोचीन एवं त्रावणकौर के आधिकारिक भ्रमण पर निकले और २५ जनवरी से १४ फ़रवरी तक यहां का भ्रमण किया। २६ जनवरी को कोचीन के राजा ने इनसे भेंट की व इनके सम्मान में एर्णाकुलम में रात्रिभोज का आयोजन किया। …

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Quelle: Text: Wikipedia – „कोच्चि“, Autorinnen und Autoren (Versionsgeschichte), CC BY-SA 4.0 · Foto: Suresh Babunair, CC BY 3.0 – Wikimedia Commons