अल्मोड़ा जिला: इतिहास
१८१४ के आंग्ल गोरखा युद्ध में विजय के पश्चात १८१६ की सुगौली की संधि के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी ने कुमाऊँ, देहरादून और पूर्व गढ़वाल को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला दिया और पश्चिम गढ़वाल राजा सुदर्शन शाह को दे दिया जिसमें उन्होंने टिहरी रियासत की स्थापना की। कुमाऊँ मण्डल तब केवल २ जिलों में विभाजित था, कुमाऊँ तथा तराई, जिनके मुख्यालय क्रमशः अल्मोड़ा तथा काशीपुर नगरों में स्थित थे। कुमाऊँ जिले के अंतर्गत वर्तमान उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, चम्पावत, पिथौरागढ़, पौड़ी गढ़वाल, चमोली तथा रुद्रप्रयाग जिले के कुछ भाग आते थे, और तराई जिला वर्तमान उधम सिंह नगर जिले के समकक्ष था।
१८३७ में पूर्वी गढ़वाल क्षेत्र को कुमाऊँ जिले से निकालकर अलग जिला घोषित कर दिया गया, और इसका मुख्यालय पौड़ी नगर में रखा गया। नैनीताल तहसील को १८९१ में कुमाऊं जिले से स्थानांतरित कर तराई के साथ मिला दिया गया, और फिर इसके मुख्यालय को काशीपुर से नैनीताल में लाया गया था। १८९१ में ही कुमाऊँ और तराई जिलों का नाम उनके मुख्यालयों के नाम पर क्रमशः अल्मोड़ा तथा नैनीताल रख दिया गया था।
१९६० के दशक में बागेश्वर और चम्पावत जिले नहीं बनें थे और तब ये अल्मोड़ा जिले के ही भाग थे। पिथौरागढ़ जिला २४ फरवरी १९६० को, और बागेश्वर जिला १५ अगस्त १९९७ को अल्मोड़ा जिले से अलग कर बनाया गया था। २०११ में रानीखेत जिले को भी अल्मोड़ा जिले से बनाने की घोषणा हुई थी, परन्तु उस घोषणा को अमल में नहीं लाया गया।