Kotha Patnam
Neuigkeiten, Termine, Marktplatz und Menschen aus Kotha Patnam.
Aktuelle Beiträge
- बगीचे के फल-सब्ज़ियाँ बाँटें · Kotha Patnam ·
कभी-कभी आम का पेड़ या सब्ज़ी की क्यारी एक परिवार की ज़रूरत से ज़्यादा उपज देती है। उसे ख़राब होने देने के बजाय पड़ोसियों में बाँटिए या घर के बाहर 'मुफ़्त ले जाएँ' लिखकर रख दीजिए। इससे खाने की बर्बादी भी कम होती है और चेहरों पर मुस्क…
- गली में छोटी-सी दावत · Kotha Patnam ·
गली की दावत बड़ी होना ज़रूरी नहीं। हर घर एक व्यंजन लाए, मेज़ लगाएँ और धीमा संगीत चलाएँ, बस इतना ही काफ़ी है। बच्चे साथ खेलते हैं और बड़े एक-दूसरे को बेहतर जान पाते हैं। सभी घरों को पहले से बता दीजिए और बाद में मिलकर सफ़ाई कीजिए…
- स्क्रीन के समय में संतुलन · Kotha Patnam ·
फ़ोन दोस्तों से जुड़े रहना आसान बनाता है, लेकिन ज़्यादा इस्तेमाल से थकान और नींद की दिक़्क़त हो सकती है। सोने से पहले नोटिफ़िकेशन बंद कीजिए या खाना खाते समय फ़ोन दूर रखिए। बाहर टहलना या दोस्तों से आमने-सामने मिलना भी ताज़गी देता है।…
- पहली कमाई का हिसाब कैसे रखें · Kotha Patnam ·
अपनी मेहनत की पहली कमाई गर्व की बात है। उसे हिस्सों में बाँटकर देखिए: ज़रूरी ख़र्च, बचत और थोड़ा-सा अपनी ख़ुशी के लिए। एक महीने तक ख़र्च लिखिए, तब पता चलेगा पैसा कहाँ जाता है। उन किस्तों से सावधान रहिए जो सस्ती दिखती हैं पर कुल मि…
- सूर्यास्त देखने की सबसे सुंदर जगह · Kotha Patnam ·
सुंदर सूर्यास्त देखने के लिए दूर जाने की ज़रूरत नहीं; कभी एक पुल, छोटी पहाड़ी या खेत का किनारा ही काफ़ी है। Kotha Patnam में शाम की रोशनी देखने के लिए आपकी पसंदीदा जगह कौन-सी है? कमेंट में सुझाइए।
- Kotha Patnam का आपका पसंदीदा बाज़ार · Kotha Patnam ·
सुबह का बाज़ार, शाम का हाट या सप्ताहांत का बाज़ार, सबकी अपनी रौनक है। वहाँ ताज़ा सामान भी मिलता है और मिलनसार दुकानदारों से बातचीत भी होती है। आप किस बाज़ार में अक्सर जाते हैं, और वहाँ कौन-सी दुकान ज़रूर देखनी चाहिए? कमेंट में…
- Kotha Patnam से जुड़ी बचपन की यादें · Kotha Patnam ·
बहुत से लोगों को आज भी स्कूल के बाहर की चाट वाली दुकान या शाम को खेलने वाला मैदान याद है। कुछ जगहें आज भी हैं, कुछ बदल गई हैं। Kotha Patnam से जुड़ी आपकी कौन-सी बचपन की याद है? आइए कमेंट में प्यारे क़िस्से साझा करें।
- पुदुच्चेरी – लगभग 300 वर्षों की फ्रांसीसी विरासत · Puducherry ·
पुदुच्चेरी, जिसे पहले पॉन्डिचेरी कहा जाता था, लगभग 300 वर्षों तक फ्रांसीसी अधिकार में रहा। यह एक फ्रांसीसी उपनिवेश था जिसमें चार अलग-अलग ज़िले शामिल थे, और आज भी यहाँ की सड़कों, भवनों और संस्कृति में फ्रांसीसी वास्तुकला की छाप सा…
- तमिल नाडु – चोल, पांड्य और पल्लव राजवंशों की भूमि · Tamil Nadu ·
तमिल नाडु भारत के सबसे प्राचीन सांस्कृतिक क्षेत्रों में से एक है। यहाँ चोल, पांड्य और पल्लव जैसे महान राजवंशों ने शासन किया, और संगम साहित्य के रूप में तमिल भाषा की समृद्ध परंपरा विकसित हुई। तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर, जिसे चोल …
- लक्षद्वीप – अरब सागर के द्वीप, 661 ई. से इस्लामी परंपरा · Lakshadweep ·
लक्षद्वीप अरब सागर में भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट से दूर स्थित द्वीपसमूह है। इसके शुरुआती उल्लेख 'एरिथ्रियन सागर के पेरिप्लस' में मिलते हैं, और संगम साहित्य में चेरों द्वारा इन द्वीपों पर नियंत्रण का उल्लेख है। स्थानीय परंपरा के अनुसार…
- अण्डमान और निकोबार – 30 दिसंबर 1943 को फहराया गया तिरंगा · Andamanen und Nikobaren ·
अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह के इतिहास में 30 दिसंबर 1943 का दिन विशेष है, जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने श्री विजयपुरम में तिरंगा फहराया। इसकी स्मृति में आज भी हर वर्ष 30 दिसंबर को भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। ब्रिटिश शासन…
- झारखण्ड – मुण्डा और भूमिज जनजातियों की प्राचीन धरती · Jharkhand ·
झारखण्ड में राज्य निर्माण की प्रक्रिया मुण्डा और भूमिज जनजातियों ने शुरू की। छोटानागपुर में मुण्डा नेता रिसा मुण्डा ने सुतिया पाहन को शासक चुना और सुतिया नागखण्ड नामक राज्य की स्थापना की। भूमिज जनजाति ने धालभूम, सिंहभूम, मानभूम और…
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली – इन्द्रप्रस्थ से भारत की राजधानी तक · Delhi ·
दिल्ली का सबसे प्राचीन उल्लेख महाभारत में इन्द्रप्रस्थ के रूप में मिलता है, जो पांडवों की राजधानी थी। पुरातात्विक प्रमाण बताते हैं कि ईसा से दो हज़ार वर्ष पहले भी यहाँ मनुष्य रहते थे, और मौर्य काल से यहाँ नगर का विकास शुरू हुआ। 'पृ…
- मध्य प्रदेश – भीमबेटका, साँची और खजुराहो का हृदय प्रदेश · Madhya Pradesh ·
भारत के हृदय में बसा मध्य प्रदेश मानव इतिहास की अद्भुत धरोहरों का घर है। भीमबेटका के शैलाश्रयों में हज़ारों वर्ष पुराने शैलचित्र हैं, साँची का स्तूप सम्राट अशोक के समय से जुड़ी बौद्ध परंपरा का प्रतीक है, और खजुराहो के मंदिर मध्यकाली…
- छत्तीसगढ़ – प्राचीन दक्षिण कोशल और दंडकारण्य · Chhattisgarh ·
छत्तीसगढ़ प्राचीन काल के दक्षिण कोशल का हिस्सा है। पौराणिक काल का कोशल प्रदेश बाद में उत्तर कोशल और दक्षिण कोशल में बँट गया, और दक्षिण कोशल ही आज का छत्तीसगढ़ कहलाता है। इससे पहले यह दंडकारण्य, गोंड लोगों का प्राचीन निवास स्थान था। …
- हरियाणा – सरस्वती तट की सभ्यताएँ और गीता की भूमि · Haryana ·
हरियाणा की धरती वैदिक सभ्यता और सिंधु घाटी सभ्यता से गहराई से जुड़ी है। सरस्वती नदी के किनारे सिंधु घाटी जितनी पुरानी कई सभ्यताओं के अवशेष मिले हैं, जैसे भिवानी के मिट्टाथल और कुणाल। मान्यता है कि महाभारत का युद्ध यहीं हुआ, जहा…
- तेलंगाना – काकतीय वंश और तेलुगूभाषियों की भूमि · Telangana ·
'तेलंगाणा' का अर्थ है 'तेलुगूभाषियों की भूमि'। इस क्षेत्र पर सदियों तक अनेक शासकों ने राज किया: सातवाहन, काकतीय वंश (1083–1323), बहमनी सल्तनत, क़ुतुब शाही राजवंश (1512–1687), मुग़ल और फिर आसफ़ जाही राजवंश (1724–1948)। काकतीय क…
- महाकाली अंचल – वह अंचल जो २०१५ में सुदूरपश्चिम प्रदेश का हिस्सा बना · Mahakali ·
महाकाली नेपाल के उन चौदह अंचलों में से एक था, जो सुदूर-पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र का हिस्सा हुआ करते थे। इसका मुख्यालय कंचनपुर जिले के भीमदत्त में था, और यहीं से पूरे क्षेत्र का प्रशासन चलता था। सन् २०१५ के प्रशासनिक पुनर्गठन ने इस व्…
- सेती अंचल – धनगढ़ी और सिलगढ़ी का सुदूर-पश्चिमी अंचल · Seti ·
सेती नेपाल के चौदह अंचलों में से एक था और सुदूर-पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र का हिस्सा था। इसका मुख्यालय पहाड़ी कस्बे सिलगढ़ी में था, जबकि तराई में बसा धनगढ़ी इस अंचल का सबसे प्रमुख नगर रहा। यही दोहरा स्वरूप, ऊपर पहाड़ और नीचे समतल तरा…
- धवलागिरी अंचल – धौलागिरी की छाया में बसा पश्चिमी अंचल · Dhaulagiri ·
धौलागिरी हिमशिखर के नाम पर बने इस अंचल की पहचान उसके पहाड़ ही हैं। १० सितम्बर २०१५ से पहले यह नेपाल के चौदह अंचलों में से एक था और पश्चिमांचल विकास क्षेत्र में स्थित था; इसका मुख्यालय बगलुंग में था। नए संविधान के बाद पूरा देश …
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